Saturday, August 2, 2008

व्यावहारिक ज्ञान

अलग अलग देशों के चार लडके पढने मे बडे तेज़ थे और हमेशा पढने मे यकीन रखते थे। इसलिए वे चारो काशी गए और उस समय के सबसे बडे गुरू से पढना आरम्भ किया। १२ साल तक पढने के बाद वे सभी अपने अपने देश की ओर लौट चले। सभी विद्या पाने के अभिमान से चूर थे। इन सभी ने किताबी ज्ञान ख़ूब प्राप्त किया था, लेकिन जीवन के ज्ञान से ये सब कोसों दूर थे।

रास्ते मे इन सभी को कुछ हड्डियाँ इधर-उधर बिखरी मिली। ये सभी शास्त्रार्थ करने लगे, यानि किताबी ज्ञान के आधार पर अपनी अपनी बाते बताने लगे। एक ने कहा, मैं हड्डी का जानकार हूँ, इसलिए दावे के साथ कह सकताहूँ हूँ कि ये हड्डियां, शेर की हैं। दूसरे ने कहा की मैं त्वचा का माहिर हूँ, इसलिए इसकी हड्डियों पर खाल चढ़ा सकता हूँ। तीसरे ने कहा की मैं आवाज़ का एक्सपर्ट हूँ, इसलिए इसे आवाज़ दे सकता हू। चौथे ने कहा की मैं पुनॅजीवन विद्या सीखी है इसलिए इसमें जान फूंक सकता हूँ।

सभी अपनी अपनी विद्या आजमाने लगे। पहले ने सभी हड्डियों को जोड़कर शेर का ढांचा खड़ा कर दिया। दूसरे ने उस पर खाल चढ़ा दी। तीसरे ने उसमें आवाज भर दी और चौथे ने उसमें जान फूंक दी। बस अब एक भयानक गर्जन के साथ शेर उठाकर खडा हुआ। वह बेहद भूखा था और अपने सामने इतने अच्छे शिकार को देख कर तुरंत उन पर टूट पड़ा और सभी को पाकर कर खा गया।

इसलिए कहा जाता है की जीवन में किताबी ज्ञान से बढ़कर व्यावहारिक ज्ञान ज़रूरी है।

1 comment:

Udan Tashtari said...

प्रेरक प्रसंग. आभार.