Thursday, August 14, 2008
धर्मात्मा का बल
मरते समय बालि अंगद को भगवान् राम को सौंप गए थे। अंगद राम की सेना के वरिष्ठ सेनापतियों में से थे। उन्होंने रावण की सभा में अपने बल का प्रदर्शन करके रावण को भी चुनौती दी। छोटे से धर्मात्मा का बल अनीतिवान राज्याध्यक्ष से भी बड़ा होता हैं। वानर स्वल्प शक्तिवान थे, तो भी उन्होंने अधर्म का प्रतिरोध करने में अपना सर्वस्व झोंक दिया और मारे जाने की तनिक भी परवाह नहीं की। ऐसे शूरवीर धर्मात्मा का जीवन संसार में धन्य माना जाता हैं।
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