कालिदास एक गया-बीता व्यक्ति था, बुद्धि की दृष्टि से शून्य एवं काला-कुरुप। जिस डाल पर बैठा था, वह उसी को काट रहा था। जंगल में उसे इस प्रकार बैठे देख राज्यसभा से विद्योत्तमा द्वारा अपमानित पंडितों ने उस विदुषी को शास्त्रार्थ में हराने व उसी से विवाह कराने का षडयंत्र रचने के लिए कालिदास को श्रेष्ठ पात्र माना। शास्त्रार्थ में अपनी कुटिलता से उसे मौन विद्वान बताकर उन्होंने प्रत्येक प्रश्न का समाधान इस तरह किया कि विद्योत्तमा ने उस महामूर्ख से हार मान उसे अपना पति स्वीकार कर लिया। पहले ही दिन जब उसे वास्तविकता का पता चला तो उसने उसे घर से निकाल दिया। धक्का देते समय जो वाक्य उसने उसकी भत्र्सना करते हुए कहे , वे उसे चुभ गये। दृढ़ संकल्प अर्जित कर वह अपनी ज्ञान वृद्धि में लग गया। अंत में वही महामूर्ख अपने अध्ययन से कालांतर में ``महाकवि कालिदास´´ के रुप में प्रकट हुआ और अपनी विद्वता की साधना पूरी कर विद्योत्तमा से उसका पुनर्मिलन हुआ।
Thursday, September 4, 2008
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2 comments:
दृढ़ संकल्प से मनुष्य क्या नहीं कर सकता ?
अस्ति कश्चित वाग्विविशेष ..इस वाक्य का जवाब दिया कालिदास नें, हर शब्द पर महा काव्य लिखकर!!
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